Monday, May 28, 2018 Register
 
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यथा चित्तं तथा वाकयं यथा वाकयं तथा क्रिया । चित्ते वाचि क्रियायां साधुनामेकरूपता ||

 
 
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|| धर्मस्य जयोस्तु ||



दैवाधीनं जगत सर्वं | मंत्राधीनंतु दैवतं ||
तन्मंत्रं ब्राह्मणाधीनं | ब्राह्मणों मम देवता || 

विश्वकल्याण केलिए सुभ आह्वान


 

समाज मे हर एक भक्तजन को
हमारे धर्म के बारे मे सही अवगाहन देने की उद्देश्य से
'महदाचार्य' आमंची कल्याण शास्त्री जी
और उनके शिष्यगण के सात
इस "विश्व कल्याण" नामक
आध्यात्मिक वेबसैट को प्रारर्म्भ किया गया है |


विश्वस्य कल्याणमस्तु

 

 
 
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